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सूचनाएं

वैश्विक ज्ञानगंगा सेवा ट्रस्ट-वडोदरा, आवासीय संस्कृत वर्ग (दिनांक 15/05 /2022 से 25/05/2022)    

बालसंस्कार वर्ग जून 2021 से शुरू होने जा रहा है, केवल सीमित बच्चों को ही प्रवेश मिलेगा, आज ही बालसंस्कार वर्ग में प्रवेश प्राप्त करें ।    

3 महीने में संस्कृत सीखें, जून 2021 से नई कक्षा शुरू हो रही है, आज ही संस्कृत संभाषण कक्षा में शामिल हों ।    

अपने बच्चों को भगवान श्री कृष्ण द्वारा सुनाई गई श्रीमद् भगवद गीता सिखाएं और उनमें संस्कारों का सिंचन करें, जून 2021 से नई कक्षाएं शुरू हो रही हैं, आज ही प्रवेश प्राप्त करें ।    

केवल 3 महीनों में भारतीय शास्त्रों का पूरा ज्ञान प्राप्त करें, जून 2021 से नई कक्षा शुरू हो रही है, आज ही शास्त्र कक्षा में प्रवेश प्राप्त करें ।    

विभिन्न देवताओं के स्तोत्रों को आसानी से गाना सीखें और उनका अर्थ जानें, जून 2021 से नई कक्षा शुरू हो रही है, आज ही स्तोत्र कक्षा में प्रवेश प्राप्त करें ।    

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सुरक्षितसर्वाधिकाराः / Copyright © 2021

श्रवण कौशल के उद्देश्य

विद्वान् बहुश्रुतः

दूसरों की बात को ध्यानपूर्वक सुनने की आदत डालना।
दूसरे के द्वारा किए गए उच्चारण को सुनकर शुद्ध उच्चारण का अनुकरण करना।
शुद्ध सामग्री का अर्थ समझने की योग्यता विकसित करना।
वक्ता के मनोभावों को समझने में निपुण बनना।
ध्वनियों का विभेदीकरण करने की क्षमता विकसित करना।
छात्रों में शब्द भण्डार की वृद्धि करना।

सम्भाषण कौशल के उद्देश्य

श्रुतिमधुरं सम्भाषणम्

अपने भावों, विचारों, अनुभवों को सरलतापूर्वक, स्पष्ट ढंग से व्यक्त करने के योग्य बनना ।
शुद्ध उच्चारण, उचित स्वर, उचित गति एवं हाव-भाव के साथ बोलना सीखना ।
निसंकोच होकर अपने विचारों को व्यक्त करने के योग्य बनना ।
परस्पर वार्तालाप करने के योग्य बनना ।
धारा प्रवाह बोलने के योग्य बनना ।

पठन कौशल के उद्देश्य

माधुर्यमक्षरव्यक्तिः पदच्छेदस्तु सुस्वरः।
धैर्यं लयसमर्थं च षडेते पाठका गुणाः॥

वर्णमाला के सभी अक्षरों को पहचान कर पढ़ना ।
पठित सामग्री के विचारों को समझाना ।
पठित सामग्री पर अपना मंतव्य स्थिर करना ।
लेखक के मनोभावों को स्पष्ट ढंग से समझने की योग्यता विकसित करना ।

लेखन कौशल के उद्देश्य

यः पठति लिखति पश्यति परिपृच्छति पण्डितानुपाश्रयति ।
तस्य दिवाकरकिरणैर्नलिनीदलमिव विकास्यते बुद्धिः ॥

वर्णों को ठीक-ठीक लिखना सीखना।
सुंदर लेखों का अभ्यास करना।
शुद्ध अक्षर विन्यास का ज्ञान कराना।
वाक्य रचना के नियमों से परिचित होना।
विचारों को तार्किक क्रम में प्रस्तुत करना।
अनुभवों का लेखन करना।
लिपि, शब्द, मुहावरों का ज्ञान होना।

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